Monthly Archive 九月 2018

Byfeibisi

डायबिटीज के लोगों को क्या खाना चाहिए | Diabetes Diet

Diabetes Diet

Diabetes Diet

लोगो की आदते समय के साथ बदलती जा रही है। हर क्षेत्र में लोग आगे बढ़ रहे है। लोग अपने आप को कामयाब बनाने के लिए दिन रात काम कर रहे है। लेकिन जिस गति के साथ सभी अपने काम में व्यस्त हो चुके है उन्हें अपने आसपास का कुछ भी खयाल नही यहातक की उन्हें खुद की भी परवाह नहीं है। लोग खुद के स्वास्थ्य पर कम ध्यान देते है लेकिन आगे चलकर उन्हें पता नहीं होता इसका परिणाम कितना डरावना होने वाला है। आजकल बीमारिया भी बढती जा रही। हररोज कोई ना कोई नयी बीमारी संकट के रूप में सामने आ जाती है। ऐसी ही एक बीमारी आजकल गंभीर रूप ले रही है। वो हैं डायबिटीज।

आजकल हर दुसरे व्यक्ति को डायबिटीज की बीमारी हो रही है। इसीलिए अगर एक बार डायबिटीज हो जाए तो उस इन्सान का जीवन काफी कठिन हो जाता है। कई सारी चीजो पर उसके लिए पाबन्दी लगाई जाती है। ऐसे में डायबिटीज के लोगो को डॉक्टर सही तरीके का भोजन करने पर जोर देते है। क्यों की गलत भोजन लेने इस बीमारी का खतरा और भी बढ़ सकता है। इसीलिए कौन सी चीजे खानी चाहिए और कौनसी चीजी नहीं खानी चाहिए इसकी पूरी जानकारी होना बेहद जरुरी हो जाता है। आज हम इसी अहम विषय पर आपको जानकारी देने वाले। जीन लोगो को डायबिटीज की बीमारी है उन्हें यह जानकारी बहुत ही लाभदायक साबित होगी।

Diabetes Diet
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डायबिटीज के लोगों को क्या खाना चाहिए – Diabetes Diet

डायबिटीज के मरीजों ने इन पाच तरह के पदार्थ को अपने भोजन में जरुर लेना चाहिए। अगर आप को डायबिटीज है तो उचित पदार्थ को अपने खाने में शामिल कर लेना चाहिए तभी आपका भोजन संतुलित रहेगा। क्यों की किसी एक चीज को खाने से सभी पोषक तत्व नहीं मिल सकते इसीलिए खाने में सभी तरह की चीजे शामिल करनी चाहिए ताकी शरीर को सभी जरुरी पोषक तत्व मिल सके। डायबिटीज के मरीजो को निचे दी गयी चीजो का अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए।

  • हरी सब्जिया
  • अनाज
  • ताजे फ़ल
  • दूध से बने सभी उत्पाद जिनमे वसा की मात्रा कम हो
  • चिकन, फिश और बीफ

ऊपर जीन चीजे को बताया गया है उन्हें डायबिटीज के मरीजो ने अपने खाने में शामिल करना बहुत जरुरी है लेकिन डायबिटीज के मरीज इन चीजे के अलावा बाकी के चीजे भी खा सकते है।

अगर किसी ने अपने खाने पिने पर विशेष ध्यान नहीं दिया तो उसे आगे चलकर कई सारी तकलीफों का सामना करना पड़ सकता है इसीलिए समय रहते अपने भोजन में सुधार कर एक संतुलित भोजन लेना चाहिए। डायबिटीज के मरीजो ने पुरे दिन में अपने भोजन और नाश्ते में सही अन्तर रखना बहुत जरुरी है। सही समय पर भोजन कर लेने से खून में सुगर की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है।

केवल सही तरीके का भोजन लेना ही काफी नहीं बल्की खाने के समय कौनसी चीजो को सही मात्रा में खाना है इसका खयाल रखना भी जरुरी है। डायबिटीज एसोसिएशन का मानना है की जब कोई भी मरीज खाना खाता है तो उस वक्त उसके खाने की थाली में एक हिस्से में पालक, गाजर, कोबी और टमाटर जैसी सब्जिया होनी चाहिए और दुसरे हिस्से में अनाज से बने पदार्थ, पास्ता, ब्राउन चावल होने चाहिए और इसके साथ में फिश, सोयाबीन, अंडे, मास से बनी चीजे भी होनी चाहिए। खाने में दूध और कुछ फलो का भी सेवन करना चाहिए।

खाने में कितनी मात्रा में कार्बोहायड्रेट लेना चाहिए बेहद जरुरी है। इसके बारे में डॉक्टर अपने मरीजो को हमेशा बताते रहते है क्यों की कार्बोहायड्रेट की मात्रा अगर शरीर में अधिक मात्रा में हो गयी तो इससे खून में सुगर की मात्रा पर विपरीत परिणाम पड़ता है। कार्बोहायड्रेट लेने के बाद में वे ग्लूकोस में परिवर्तित हो जाते और दिनभर शरीर को काम करने के लिए उर्जा की जरुरत पड़ती है और यह उर्जा कार्बोहायड्रेट से मिलती है।

इसीलिए एक समय पर कार्बोहायड्रेट अधिक मात्रा में लेने से खून में सुगर की मात्रा अचानक बढ़ सकती है। इसीलिए पुरे दिन में कार्बोहायड्रेट को थोडा थोडा करके लेना चाहिए। अनाज, फ़ल, दूध और दही में कार्बोहायड्रेट होता है लेकिन डायबिटीज के मरीजो के लिए ऊपर बताई गयी चीजे लाभदायक है। सोडा, कैंडी और मीठे पदार्थ में कार्बोहायड्रेट होता है लेकिन इनमे पोषक तत्व बहुत ही कम रहते है इसीलिए इन्हें कम मात्रा में ही लेना चाहिए।

मक्खन और वसा वाले मास में संतृप्त वसा बड़ी मात्रा में होता है जिसकी वजह से ह्रदय से जुडी बीमारिया होने का खतरा बढ़ जाता है, इसीलिए इन चीजो से दूर रहना ही बेहतर है। लेकिन मछली, स्वस्थ तेल और बादाम, अखरोट जैसे नट्स खाने से डायबिटीज के मरीजो को काफी लाभ मिलता है क्यों की इनमे ओमेगा 3 जैसे संतृप्त अम्ल रहते है जिसकी वजह से ह्रदय की बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।

जीन चीजो में नमक (सोडियम) अधिक मात्रा में होता है उन्हें लेने से रक्तचाप बढ़ जाता है इसीलिए उच्च रक्तचाप को रोकने के लिए पालक, टमाटर और केले का सेवन करना जरुरी है क्यों इनमे पोटाशियम अधिक मात्रा में होता है जो उच्च रक्तचाप को कम करने का काम करता है। डायबिटीज के मरीजो को हमेशा फ़ल खाने की सलाह दी जाती है लेकिन फलो को भी नियमित मात्रा में ही लेना चाहिए क्यों की फलो में भी कार्बोहायड्रेट होते है। उसी तरह ड्राई फ्रूट्स को भी सही मात्रा में लेना चाहिए।

जीन लोगो को डायबिटीज की बीमारी है उन्होंने सही तरीके से भोजन लेना चाहिए। उसके लिए रोज के खाने के कुछ बदलाव करना जरुरी है। अच्छी आदत डालने से डायबिटीज के मरीज पूरी तरह से स्वस्थ रह सकते है उसके लिए उन्हें जरुरत है तो खाने में कुछ बदलाव करने की। निचे दी गयी बातो पर ध्यान देने से मरीजो को बहुत लाभ मिल सकता है:

मीठे ड्रिंक की जगह पानी पीना, बिना शक्कर की चाय, और कम कैलरी वाली चीजे।

दिन में 4 औंस फ़ल का जूस पिए क्यों की फलो में कार्बोहायड्रेट बड़ी मात्रा में मौजूद होते है।

खाने में अधिक मात्रा में सब्जियों को शामिल करे।

मास में भी पसलियों की आखो की बजाय सरलोइन मास का इस्तेमाल करे, प्रेत्जेल और चिप्स खाने के बजाय शिमला मिर्च, अजवायन और गाजर जैसी सब्जियों का इस्तेमाल करे।

अधिक वसा मात्रा के उत्पाद की जगह पर कम वसा वाले दूध के उत्पाद का सेवन करे।

आम दही की जगह पर ग्रीक दही का इस्तेमाल करे जिसमे प्रोटीन और कैल्शियम अधिक मात्रा में रहता है।

आइसक्रीम खाने के बजाय जमा हुआ दही का इस्तेमाल करे।

फ्राइड किये हुए चीजो की जगह पर सेके हुए, भुने हुए चीजे खाने की आदत डाल दे।

किसी भी सब्जी को पकाने से पहले उसे अच्छी तरह से धोले ताकी उसमे जो सोडियम की मात्रा है वह कम हो जाती है।

सब्जी, फिश और पास्ता को और अच्छा बनाने के लिए उसमे मक्खन और नमक डालने की बजाय निम्बू के रास का इस्तमाल करे।

खाना बनाने के समय मक्खन डालने की बजाय स्वस्थ तेल का इस्तेमाल करना चाहिए।

इस तरह से छोटी छोटी बातो पर ध्यान देने से कई सारे लाभ होते है और डायबिटीज के मरीज का स्वास्थ्य भी पूरी तरह से ठीक रहता है।

डायबिटीज के मरीजो ने अपने खानपान पर विशेष ध्यान क्यों देना जरुरी यह हमें यहाँ दी गयी जानकारी से मालूम पड़ता है। जीन लोगो को डायबिटीज की बीमारी हुई है उन्हें डरने की कोई जरुरत नहीं। बस उन्हें केवल जरुरत है तो अपने आहार पर ध्यान देने की। अगर कोई भी व्यक्ति नियम के अनुसार खाने पिने पर ध्यान द तो उसे इस बीमारी से कुछ भी तकलीफ नहीं हो सकती।

वह एक आम इन्सान की तरह की रह सकता है। उसे केवल अपने आहार को नियंत्रण में करने की जरुरत है। एक बार अगर उसने इसबात पर नियंत्रण पा लिया तो उसे किसी भी तकलीफ का सामना नहीं करना पड़ता और वह बड़े आराम से अपना जीवन व्यतीत कर सकता है।

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The Role of Storytelling in the Design Process

Storytelling is in the heart of our DNA as a human being, it helps us connect events is a holistic experience through time. This unique nature of stories makes it one of the essential tools during the design process of both products and services. Previously, we explored the nature of the design thinking process and how it aims to understand problems from the user perspective to address them with the human-centered design.

What does happen when asking consumers about using a product? They usually start to tell about their experience in the form of a story. They describe the events they went through and the lessons that they faced at each stage. As a designer, I used to find this method an interesting one to learn about the consumer experience and then reflect it into an outcome solution of the design process. There is nothing better than hearing about the product from the mouth of the consumers or see then use in real life.

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During the design process, storytelling is used to understand the underlying problems that consumers face when using a product or a service, and then use this knowledge in reflective practice to formulate the solution which is tested by the consumers. Hence, storytelling contributes to the different stages in the design process for different purposes in each step.

Decoding the Storytelling: The Nature of the Story

To understand the storytelling and how it is implemented in the design process, we need to explore its different parts and how they are put into a unified component called “a story.” Generally, every story has the following elements:

  • Domain (What) – This is where you define the problem or the topic that is addressed inside the story. In the design process, it can be a consumer target such as booking a medical appointment or refund an online purchase order.
  • Players (Who) – The players involved in the story or the people who are included in the story. The leading player represents the demographic information that will be used to build the persona engaged in the design process. The principal character here is the consumer as the one who faces the experiences. Other players may involve into the story such as the customer support or the employees who communicate with consumers
  • Story flow (How) – Each story consists of three main phases; beginning, middle, and end. In each story, there is the central crisis or a problem that usually comes near the middle stage. This is typically the problem targeted inside the design process. However, there may be other obstacles or issues that come before the main event in the story as highlighted in the below figure.
Service design process storytelling
Figure 1. The typical story arc (source)

Storytelling in the design process can be implemented using various techniques and methods such as the following:

  1. Digital and Visual storytelling;
  2. Scenario generation;
  3. Storyboarding;
  4. Plays;
  5. Animation;
  6. Talk and images; and
  7. Text and images

When Storytelling is Used in the Design Process

The design thinking process ensures the user evolvement in every stage to build a user-centred solution. Therefore, the storytelling is used throughout the design process, yet there is a different usage goal in each phase. Generally, the storytelling can be used as three pair phases; problem framing, solution framing, and solution implementation.

storytelling in design process
Figure 2. When to use the storytelling in the design process based on the Double Diamond and IDEO Design Thinking process. (adopted from the Design Council and IDEO)

Problem Framing

This stage comes early in the design process. It aims to explore the problem to build an accurate understanding of the main issue that needs to be solved. In the problem framing stage, the storytelling can be used in this explorative initiative. It helps the design team to engage with the user to define the problem using a qualitative data from the consumers.

Multiple storytelling sessions can be held with the consumers who meet with the persona characteristics. Then, the data can be collected and analysed to build a generalised idea about the problem. The advantage of using the storytelling tool is that it helps to create empathy with the problem as the consumers tell their stories from their own perspective describing their pain points in the process. It helps to build a persona empathy map about the consumers’ feelings and experience.

Solution Framing

In the solution definition and prototyping stages, the design team would number of potential solutions that need to be tested and evaluated to understand which is the best solution from the user perspective. In this stage, the storytelling can be used again in this stage but with a different purpose. In this case, the team tries to understand which solution is the most appropriate for the consumer. The storytelling can be used in this part of the design process to build a two communication with the consumer to validate the efficiency of the solution. In the prototyping stage, storytelling plays an even more critical role as the consumers can use the solution and provide feedback to the design team. The team will be able to observe how the consumers use the prototype solution and build a realistic understanding of the suggested solutions.

Solution Implementation

One of the practical features of the design thinking process is the ability to get consumer feedback about the product or the service to improve the product in the future. Here, the storytelling can be used to explore how the final product is used in real life and how consumers interact with it in their everyday life. The information collected from the feedback sessions are usually used to improve the future versions of the product. Figure 2 above shows when the storytelling can be applied during the design process based on two commonly used models; the Double Diamond by the Design Council and the IDEO Design Thinking Process.

While the storytelling can be used in different stages of the design process as above, it is a suitable tool to collected personalised experiences from the consumers. It may be hard to build a generalised data based on it because of the different nature of each consumer’s story, but I believe this is one of the strengths of the tool. It helps us to understand the empathic experience that the users face when using a product or a service. This unique strength point can be valuable for the design thinking process especially when it targets specific problems such as medical interventions or personalised use cases.

In sum, the storytelling is a powerful communication tool that enables us as a human being to understand more about our emotional experiences. This makes it an effective method to use during the design process. It can be used during the design thinking process phases with a different goal in each stage. Storytelling can help us to gather personalised emotional data about our consumer’s experience which can be hard to collect using other research methods such as the survey and consumer journey mapping.

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